Times Himachal : जिला शिमला में इस साल मौसम की मार से सेब उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले जिला शिमला में इस बार सेब उत्पादन लगभग आधा रह गया है। जिले के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके साथ ही जिले में सेब उत्पादन को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर के आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी तक एपीएमसी के यार्ड और यार्ड के बाहर 51,03, 490 बॉक्स सेब मंडियों में पहुंचे हैं। इनमें 26,16,680 एपीएमसी के बाजार यार्ड में और 24,86,810 की खरीद यार्ड के बाहर पहुंचे हैं।
इसके चलते ही मंडियों में सेब की आवक काफी कम है। शिमला और किन्नौर सेब उत्पादन के दो प्रमुख जिले हैं। जिले में टाइडमैन, रॉयल, स्पर, गाला, रेड गोल्ड, गोल्डन समेत कई अन्य किस्मों के सेब का उत्पादन होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि फसल का उत्पादन कम होने के बाद भी बागवानों को सीजन में अभी तक अच्छे दाम मिल रहे हैं। संवाद
इस बार फल मंडियों में सेब की आपूर्ति काफी कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर के तहत आठ मंडियों में सेब का कारोबार होता है। इस बार 7 सितंबर तक जिले में 51,03,490 बॉक्स मंडियों में पहुंचे हैं।
